Rise Of Banda Singh Bahadur Part 2 In Hindi -best Apr 2026
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बंदा सिंह बहादुर सिर्फ एक योद्धा नहीं थे। वह उस सोच के प्रतीक थे जो जाति-पाति, ऊंच-नीच से परे थी। उन्होंने गरीब किसानों को राजा बना दिया। उन्होंने जजिया खत्म किया। उन्होंने उन किलों में खालसा का झंडा फहराया जहाँ कभी अत्याचारी शासक रहते थे।
नमस्कार दोस्तों, पिछले भाग में हमने देखा कि कैसे एक साधु माधो दास ने श्री गुरु गोबिंद सिंह जी से दीक्षा लेकर ‘बंदा सिंह बहादुर’ बने और उन्हें पंजाब भेजा गया। गुरु जी के आशीर्वाद और ‘जयते’ (विजय) की ध्वनि के साथ वह निकले। अब इस भाग में जानते हैं कि कैसे इस साधु-सेनानी ने मुगल सल्तनत की नींव हिला दी।
सबसे पहला झटका समाना (Samana) को लगा, जो मुगल जासूसी और प्रशासन का गढ़ था। यह वही समाना था जहाँ के कुछ लोगों ने गुरु तेग बहादुर जी को धोखा दिया था। Rise Of Banda Singh Bahadur Part 2 In Hindi -BEST
यह सिर्फ एक जीत नहीं थी, बल्कि एक प्रतीकात्मक बदला था – गुरु घर की बेइज्जती का मुंहतोड़ जवाब। सरहिंद पर जीत के बाद बंदा सिंह ने वहाँ के लोगों को न्याय देने का वादा किया।
यहाँ Banda Singh Bahadur के उदय की द्वितीय भाग पर आधारित एक ब्लॉग पोस्ट हिंदी में प्रस्तुत है। यह ऐतिहासिक तथ्यों और वीरगाथा को सरल, प्रभावशाली शैली में प्रस्तुत करता है।
1709 के अंत तक वे पंजाब के ‘खैराल’ (वर्तमान संगरूर जिले) क्षेत्र में पहुँचे। यहाँ उन्होंने ‘लोहगढ़’ किले को अपना मुख्यालय बनाया। आपको यह ब्लॉग कैसा लगा
गुरु जी से आशीर्वाद लेकर बंदा सिंह बहादुर दक्षिण से उत्तर की ओर बढ़े। रास्ते में राजपूताना और हरियाणा के क्षेत्रों से गुजरते हुए उन्होंने स्थानीय लोगों को संगठित किया। उनका लक्ष्य स्पष्ट था – अत्याचारी मुगल शासकों और उनके सामंतों को सबक सिखाना।
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हालाँकि बंदा सिंह बहादुर की ताकत बढ़ रही थी, लेकिन दिसंबर 1710 में मुगलों की भारी सेना ने लोहगढ़ पर हमला कर दिया। बंदा सिंह को लोहगढ़ छोड़ना पड़ा और वे की बजाय मुकेरियां और ज्वालामुखी के पहाड़ी क्षेत्रों में चले गए। Rise Of Banda Singh Bahadur Part 2 In Hindi -BEST
बादशाह ने नामक सबसे बड़े सेनापति को 30,000 सैनिकों के साथ बंदा सिंह को खत्म करने भेजा। लेकिन बंदा सिंह ने गुरिल्ला युद्ध की रणनीति से मुगल सेना को जंगलों और पहाड़ियों में भटका दिया।
बंदा सिंह ने रातों-रात 26 मई 1709 को समाना पर हमला कर दिया। उनके अर्ध-सैनिक गुरिल्ला योद्धाओं ने मुगल सेना को धूल चटा दी। समाना के जिलेदार और उसके साथियों को कड़ी सजा दी गई। इस जीत ने आम किसानों और जाट सरदारों में विश्वास जगाया कि अब कोई मुगलों से लोहा ले सकता है।